Delhi chalo ka nara kisne diya | दिल्ली चलो का नारा किसने दिया था

Delhi chalo ka nara kisne diya | दिल्ली चलो का नारा किसने दिया था – भारत की स्वंत्रता की लड़ाई में अनेक लोगो ने हिस्सा लिया था. जिसमे से कुछ लोगो के बलिदान को हम जानते हैं. लेकिन बहुत से ऐसे लोग भी हैं जिनके बलिदान को कोई जानता ही नहीं हैं. आजादी की लड़ाई में हज़ारों-लाखोँ युवाओ, युवतियों, बच्चो, औरतो और आदमियों ने अपने प्राण दीए थे. जिन्हें याद करना और श्रदांजलि देना. प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य हैं. इस आर्टिकल में हम जानेगे सुभाष चन्द्र बोस कौन थे. और दिल्ली चलो का नारा किसने दिया था.

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सुभाष चन्द्र बोस कौन थे?

सुभाष चन्द्र बोस को नेताजी के नाम से भी जाना जाता हैं. वह भारत के स्वंत्रता संग्राम के सबसे बड़े नेता थे. उन्होंने भारत को अग्रेजो से आजादी दिलाने के लिए द्वितीय युध्द के समय जापान के सहयोग से आजाद हिंदी फ़ौज का गठन किया था. उन्होंने अनेक ऐसे नारे दिए. जो हिंदुस्तान के लोगो के जहन में घुल गए थे. उनके द्वारा ‘जय हिन्द’ और ‘तुम मुझे खुद दो मै तुम्हे आजादी दूंगा’ जैसे नारे ने लोगो को आजादी के लिए पागल कर दिया था.

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नेताजी का जन्म

नेताजी का जन्म उड़ीसा राज्य के कटक शहर में एक हिन्दू कायस्थ परिवार में हुआ था. उनके पिताजी का नाम जानकीनाथ और माताजी का नाम प्रभावती था. जानकीनाथ और प्रभावती के कुल 8 लड़के और 6 लड़किया थी. नेताजी अपने माता-पिता की नौंवी संतान थी. और पाँचवे बेटे थे. अपने भाई बहनों में सुभाष चन्द्र बोस का अत्यधिक लगाव उनके भाई शरद चन्द्र के साथ था. शरद अपने माता पिता की दूसरी संतान थी.

दिल्ली चलो का नारा किसने दिया था? |Delhi chalo ka nara kisne diya

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने सुप्रीम कमांडर के रूप में 5 जुलाई, 1943 में सिंगापूर के टाउन हाल के सामने आजाद हिन्द फ़ौज सेना को संबोधित करते हुए ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया था. नेताजी ने जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार और कॉमनवेल्थ सेना से बर्मा, कोहिमा और इंफाल में जमकर मोर्चा लिया था.

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नेताजी ने 21 अक्टूबर, 1943 में आजाद हिंद फ़ौज के नेतृत्व के हैसियत से स्वन्त्रत भारत की अस्थायी सरकारी बनाई थी. इस सरकार को जापान, जर्मनी, चीन, इटली, कोरिया, फिलीपिंस, और मान्चुको सहित 11 देशो की सरकारों का समर्थन था. जापान ने अंडबार और निकोबार द्वीप समूह नेताजी को दे दिए थे. सुभाष चन्द्र बोस ने इन द्वीप समूह का नामकरण किया था.

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कोहिमा का युध्द

इसके पश्चात् नेताजी ने जापानी सेना की सहायता से कोहिमा में फिर से अंग्रेजी सेना पर हमला किया. इस युध्द की खास बात यह थी की इस युध्द में दोनों तरफ से भारतीय ही लड़ रहे थे. क्योंकि नेताजी के आजाद हिन्द फ़ौज सेना में भी भारतीय थे. और ब्रिटिश भारतीय सेना में भी भारतीय थे. यह युध्द तीन चरणों में लडा गया था. जिसमे 3 महीनो का लम्बा समय भी लगा था.

इस युध्द में जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा था. इस युद्ध में जापान की सेना के 53,000 सैनिक मारे गए. और ब्रिटेन के 16,000 सैनिक मारे गए थे. इसमें ब्रिटेन के अलावा अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के सैनिक भी थे.

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नेताजी की मृत्यु

नेताजी की मौत इतिहास में आज तक के सबसे बड़े रहस्यों में से एक मानी जाती हैं. द्वितीय युध्द में जापान के हार के बाद नेताजी को आगे रास्ता ढूढना था. अंत उन्होंने रूस से आगे की लड़ाई के लिए सहायता मागने का निश्चय किया. इसी मसले को लेकर नेताजी 18 अगस्त, 1945 के दिन हवाई जहाज से मंचूरिया जा रहे थे. इस हवाई सफ़र के दौरान ही वह लापता हो गए. उनके बाद कभी किसी को दिखाई नहीं दिए.

स्वंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने नेताजी के मृत्यु की जाँच के लिए समय-समय पर अनेक आयोग गठित किए. लेकिन हर बार नतीजे एक समान नहीं आए. यहा तक की सन 1999 में मुखर्जी आयोग के अनुसार, 1945 में ताईवान की भूमि पर कोई हवाई दुर्घटना ही नहीं हुई थी. तो दुर्घटना में नेताजी के मरने बात पूरी तरह से असत्य ठहरती हैं.

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नेताजी की मौत आज भी रहस्य हैं. देश के जगह जगह पर लोग नेताजी को देखने का दावा करते हैं. लेकिन कौनसी बात कितनी सही हैं. इस पर निर्णय लेना बहुत कठिन हैं. एक प्रभावी व्यक्तित्व की इस तरह से मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण हैं.

निष्कर्ष

इस आर्टिकल (Delhi chalo ka nara kisne diya | दिल्ली चलो का नारा किसने दिया था) को लिखने का हमारा उद्देश्य आपको सुभाष चन्द्र बोस के जीवन के बारे में बताया हैं. नेताजी एक प्रभावी जननेता और स्वंत्रता संग्राम के प्रमुख चेहरा थे. देश के लिए इन्होने जो काम किया हैं. वह भारत देश हमेशा याद रखेगा. सुभाष चन्द्र बोस ने सुप्रीम कमांडर के रूप में 5 जुलाई, 1943 में सिंगापूर के टाउन हाल के सामने आजाद हिन्द फ़ौज सेना को संबोधित करते हुए ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया था.

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