इन्टरनेट ऑफ़ थिंग क्या है? (What is Internet of Things in Hindi) benefits & history

ज़रुर आपने IoT  कही ना सुना या पढ़ा होगा. लेकिन आपको जानना है कि ये IoT आख़िरकार है क्या. और इसका full form क्या है. आने वाले समय में इसका क्या प्रभाव हमारे जीवन में रहने वाला है . तो हर इस इन्टरनेट ऑफ़ थिंग क्या है? (What is Internet of Things in Hindi) आर्टिकल में आपको बिल्कुल आसान  भाषा में उदाहरण सहित आपके सारे IoT से सम्बन्धित सवालों के जवाब देने वाले है.

IoT (internet of things) क्या है? (What is Internet of Things in Hindi)

IoT का full form है internet of things. आज के समय में हम सभी के हाथों में मोबाइल है. और मोबाइल में इंटरनेट भी  है. हम सभी आपस में internet के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े हुए  है और बात कर सकते है. ठीक उसी प्रकार से अगर हमारे आस पास जितनी भी device (उपकरण) है. उस पर सेंसर लगा दे और internet के माध्यम से आपस में जोड़ दे तो वो आपस में एक दूसरे से बात कर पाएँगे. ये ही IoT है.

IoT कैसे काम करता है?(How Internet of Things works in Hindi)

Internet of things में उपकरणों पर लगे सेंसर उपकरण की स्थिति का data इकट्ठा करते है. और एकत्रित data को  internet कनेक्टिविटी या क्लाउड कनेक्टिविटी (cloud connectivity) के माध्यम से स्थानांतरण करते है. और जब एक बार ये data सॉफ्टवेर के पास आ जाते है तो सॉफ्टवेयर data को विश्लेषण  कर ये निष्कर्ष निकालता  है. कि क्या प्रतिक्रिया (एक्शन) करनी है.

अगर उदाहरण से समझे तो जब आप अपने घर से निकले तो आपका घर आटोमेटिक लॉक (लॉक) हो जाए . और जब वापस आए तो आटोमेटिक अनलॉक हो जाए. ये IoT के माध्यम से संभव है.

इस में लगने वाले चार प्रमुख उपकरण क्या है? (Four Main components of Internet of Things in Hindi)

IoT में मुख्यत चार प्रकार के उपकरण लगते है. जो इस प्रकार से है.

  1. सेंसर (Sensor)
  2. कनेक्टिविटी (Connectivity)
  3. Data प्रोसेसिंग (Data Processing)
  4. यूज़र इंटरफ़ेस (User Interface)

सेंसर (Sensor)

सेन्सर उपकरण (Device) पर लगा होता है. जो उपकरण की स्थिति का data लगातार इकट्ठा करता रहता है. जैसे तापमान की स्थिति को पता करने के लिये heat सेन्सर होते है.

उसी प्रकार से आपके मोबाइल में भी कही ऐसे सेन्सर लगे है. जो data एकत्र करते है जैसे कैमरा, microphone, gyroscope आदि.

कनेक्टिविटी (Connectivity)

कनेक्टिविटी की माध्यम से सेन्सर द्वारा एकत्रित data  को सॉफ्टवेयर को भेजा जाता  है. कनेक्टिविटी स्थानांतरण का माध्यम है. ये internet भी हो सकता है और क्लाउड कनेक्टिविटी भी हो सकता है.

जैसे की आपके रूम में heat sensor लगा है. heat sensor लगातार आपके रूम के तापमान की स्थिति का data internet के जरिये आपके मोबाइल application को देता रहेगा.

Data प्रोसेसिंग (Data Processing)

जब एक बार data सॉफ्टवेयर के पास आ गया. तो इसके प्रोसेस करना होता है. जिससे इसमें उपलब्ध जानकारी मिल सके. तो आपके मोबाइल application का सॉफ्टवेर इसको प्रोसेस करता है. ये जानकारी निकालता है की आपके रूम का तापमान इस वक्त कितना है.

यूज़र इंटरफ़ेस (User Interface)

अब जब सॉफ्टवेयर ने ये जानकारी data प्रोसेसिंग से निकल दी की रूम का तापमान कितना है. तो वो जानकारी कही ना कही आपको दिखेगी. जिससे आप जानकारी देख पाए. तो ये जानकारी यूज़र इंटरफ़ेस पर दिखती है.

अब उपलब्ध जानकारी के अनुसार आप दो तरीकों से प्रतिक्रिया (Action) कर सकते हो. एक तो आप मैन्युअली (Manually) कोई काम करेंगे। जैसे air conditioner चालू करेंगे अगर तापमान कम है तो. या फिर मोबाइल application में पहले से सेटिंग कर के रखेंगे की तापमान कम हो जाए तो  air conditioner स्वतः  ही चालू हो जाएगा.

अगर ये आटोमेटिक सेट किया गया है तो ये पूरा चक्र उल्टा चलेगा. और सेन्सर को ये command दी जाएगी कि रूम के तापमान को कम  करे या air conditioner को चालू करे.

इस प्रकार से IoT में मुख्यत चारो उपकरण मिल कर काम करते है. और चारों एक दूसरे पर निर्भर होते है कि क्या इनपुट मिलने वाला है.

IoT के वास्तविक जीवन से कुछ उदाहरण (Real life Application of Internet of Things in Hindi)

Smart home

Internet of Things आने वाले समय में हमारी जिंदगी को बहुत आसान करने वाला है. इस समय हमारे घर में जितने भी उपकरण है जैसे लाइट, टेलीविजन, पंखे, कंप्यूटर और भी बहुत सारे. इन सबके अलग अलग स्विच है. इन सबको अलग अलग संचालित करना होता है. अगर ऐसा हो जाए कि इन सबको एक ही प्लेटफॉर्म से संचालित किया जाए. तो हमारा काम कितना आसान हो जाएगा.

जब आप घर से बहार निकले. घर में लगे सेन्सर ये जान पाए कि घर में किसी की भी कोई आवाजाही (movement) नही है. इसका मतलब घर में कोई नही है. ऐसी स्थिति मे घर को सुरक्षित रखना है और दूसरी बात कि घर में लगे उपकरणों को बंद करना है. जिससे अनावश्यक बिजली की खपत को बचाया जाए.

सॉफ्टवेयर सेन्सर से internet के माध्यम से प्राप्त data को प्रोसेस कर. ये जान पाएगा कि घर को सुरक्षित करना है. तो सॉफ्टवेयर वापस से सेन्सर को आदेश (command) भेजेगा और घर के दरवाज़े लॉक (Lock ) कर लेगा. सारे उपकरण जो अनावश्यक बिजली खा रहे है. वो भी सॉफ्टवेयर स्वतः ही बंद कर देगा.

सॉफ्टवेयर के द्वारा आपको एक मैसेज दिया जाएगा कि घर के दरवाज़े और अनावश्यक उपकरण बंद कर दिये गए है. ताकि जान पाए  कि आपका घर बिल्कुल सुरक्षित है.

अब जब आप वापस आ जाओगे तो सिर्फ एक बटन को क्लिक (Click) करने मात्र से सारे दरवाज़े और उपकरण चालू हो जाएँगे.

ऐसे घरों को स्मार्ट होम कहते है. विकसित देशों में ये तकनीक दैनिक जीवन का हिस्सा भी है. लेकिन अभी ये तकनीक हमारे देश के आम जन के लिये काफी महँगी है.

Amazon’s Echo और Google Home इसके दो इस समय उपलब्ध बेहतरीन उदाहरण है.

Driverless Car

Driverless कार का सपना अब दूर नही है. कही संस्थान इस पर काम कर रही है. और कही प्रोजेक्ट्स अभी टेस्टिंग स्तर पर भी पहुँच चुके है. इसमें Tesla, Volvo, BMW और Google जैसे अग्रणीय संस्थान है.

 Driverless कार भी IoT तकनीक पर आधारित है. इसमें कार पर बहुत सारे सेन्सर लगे है जो कार की बाहरी और आंतरिक स्थिति का पता लगाने के लिये लगाए गए है. Gyroscope कार को सही दिशा देने के लिये लगाया गया है. ये सेन्सर लगातार क्लाउड कनेक्टिविटी (Cloud Connectivity ) के माध्यम से सॉफ्टवेयर से बात करते है. और रोड, स्पीड और ट्रैफिक का सही निर्णय लेते है.

Driverless कार तकनीक की दृष्टि से काफी उन्नत होने वाली है. अगर ये कार सड़क पर किसी से टकराती है तो सीधा एक कॉल निकटतम पुलिस स्टेशन पर जाता है. जिससे समय पर पुलिस पहुँच के स्थिति को काबू में कर ले.

Amazon Go

Amazon ecommerce की सबसे बड़ी कंपनी है. और अब amazon कंपनी ने रीटेल स्टोर (Retail Store ) में भी टक्कर देने आई है. Amazon Go के साथ. Amazon Go रीटेल store की एक चैन है. जो यूनाइटेड स्टेट में कार्यरत है.

Amazon Go सामान्य रीटेल स्टोर (Retail Store)  की तरह ही है. लेकिन इनमें किसी भी प्रकार का कैश काउंटर नही होता है. Amazon Go के store में बहुत सारे कैमरा, डिटेक्शन सेन्सर और weight स्केल लगे है. जब कोई ग्राहक कोई वस्तु उठाता है तो वह वस्तु उसकी लिस्ट में जुड़ जाती है. और वापस रखता है तो निकल जाती है.

इस प्रकार से ग्राहक का बिल बनता है. और जब ग्राहक दुकान के दरवाज़े से निकलता है. तब अपने आप Amazon Go application के माध्यम से ग्राहक के बैंक खाते या कार्ड से पैसा निकल जाता है.

Amazon Go IoT, machine learning और artificial intelligence के आधार पर काम करता है.

Smart Hospital

IoT की मदद से हॉस्पिटल इंडस्ट्री को स्मार्ट बनाया जा रहा है. अभी इस ओर बहुत सारी संस्थान काम कर रही है.

उदाहरण के साथ इसे समझते है जैसे कोई हार्ट का मरीज़ है जो अपने घर पर है. आराम से सो रहा है. और अचानक उसको हार्ट की समस्या हो जाए तो हार्ट पर लगा सेन्सर सीधा हॉस्पिटल को कॉल करेगा. हॉस्पिटल तुरंत ही एम्बुलेंस मरीज़ को लाने के लिये भेजेगा. इतनी देर में सेन्सर पूरी जानकारी हॉस्पिटल को भेजता रहेगा कि हार्ट की क्या स्थिति है. क्या समस्या हो रही है. और ऐसे मरीज़ को क्या इलाज की जरूरत है. उसी अनुसार अगर ज्यादा जटिल समस्या है तो सॉफ्टवेयर ऑपरेशन थिएटर को कॉल करेगा की ऑपरेशन की तैयारी पूरी रखे. एम्बुलेंस मरीज़ को ले के आ रही है. सॉफ्टवेयर doctor को भी जानकारी दे देगा. ताकि doctor भी तैयार रहे.

इस प्रकार से IoT का उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में कर के काफी उन्नत सेवाएँ मौजूद कराई जा सकती है.

 Smart Hotel

Smart home और Smart Hospital के तर्ज़ पर Smart Hotel की अवधारना भी आई. दुनिया की सबसे बड़ी होटल चैन कंपनी Helton इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है.

Helton IoT तकनीक का उपयोग कर. अपने ग्राहकों को Digital room key की सुविधा देती है. इस के लिये ग्राहकों को mobile  application अपने मोबाइल में रखनी होती है. एक बार जब digital Key मंज़ूर हो जाए. तो ग्राहक अपने रूम को खोलने के लिये को Digital room key का इस्तेमाल कर सकता है.

इस के अलावा ग्राहक mobile application के  माध्यम से रूम की लाइटिंग, Air Conditioner, Water Heater, मनोरंजन की सेवाएँ अपने अनुसार उपयोग कर सकते है. जो अभी तक बिल्कुल नया प्रयोग है.

IoT का इतिहास (history of Internet of Things in Hindi)

ऐसे तो Internet, IoT का अभिन्न भाग है. तो IoT, Internet के साथ ही अस्तित्व में आ गया था.

70 के दर्शक से ही इस ओर सोचा जा रहा है. कि किस प्रकार से उपकरणों को internet से जोड़ा जाए. सन 1982  में कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय ने कोका कोला वेडिंग मशीन को internet से जोड़ कर ये पता लगाया था कि इसमें लोड (Load) किये गए कोल्ड ड्रिंक ठंडे है या नही. ये उपकरण को  internet से जुड़ने का पहला प्रयोग  था.

सबसे पहले internet of things (IoT) शब्द केविन एश्टन ने सन 1999  में दिया था. जब वह आपूर्ति श्रृंखला अनुकूल में काम कर रहे थे और वरिष्ठ प्रबंधन का ध्यान RFID नामक एक नई तकनीक की ओर आकर्षित करना चाह रहे थे.

IoT के फायदे (benefits of Internet of Things in Hindi)

हमने स्मार्ट होम उदाहरण में देखा की IoT की मदद से किस प्रकार से हम अपना घर सुरक्षित रख पाएँगे. IoT हमारे जीवन को कितना आसान  कर देगा.

IoT हमारी दैनिक जीवन को इस प्रकार से प्रभावित कर सकता  है:

उत्पादकता बढ़ेगा (Production increase)

IoT के उपयोगता से हमारे उधोगो की उत्पादन की शक्ति बढ़ने लगेगी. क्योंकि मशीनें अपने आप काम करेगी. अगर कोई तकनीकी ख़राबी भी आती है. तो तुरंत ही उसकी चेतावनी मिल जाएगी . जिससे समय पर खामी को दूर किया जा सके. और उत्पादन पर कोई असर नही पड़े.

दक्षता बढ़ेगी (Efficiency increase)

इन्सान काम करते वक्त गलती कर सकता है. लेकिन मशीन नही कर सकती. इस का पूरा फायदा वस्तु की कीमत पर पड़ेगा. क्योंकि जो समय और पैसा इंसानों के ग़लतियों से  खर्च होता था वो बिलकुल बंद हो जाएगा. काम पूरी दक्षता के साथ होता रहेगा.

सही पूर्वानुमान बढ़ेगा (Predictive increase)

IoT में उपकरणों पर लगे sensors लगातार स्थिति के अनुसार data सॉफ्टवेयर को भेजता रहता है. तो ये data पूर्वानुमान के काम आ सकता है. जैसे की किसी उद्योग में कोई मशीन है. जो विशेष स्थिति में काम नही करती है जैसे की विशेष तापमान,  विशेष दबाव, या विशेष मौसम तो एकत्रित data को विक्ष्लेषण कर के पता लगाया जा सकता है.

इस प्रकार से कही तरह से data का विक्ष्लेषण करके असख्य समस्याओं का हल निकाला जा सकता है.

समय और लागत पर असर

IoT के उपयोग से समय बचेगा और लागत गिरेंगी. क्योंकि जहा पर हमे एक इन्सान को मशीन चलाने और उसकी देखभाल करने के लिये रखना पड़ता है. वह यही काम IoT करेगी. जिस कारण से लागत में कमी आएगी.

जो काम आज इंसानों को करना पड़ रहा है वो मशीन करेगी। तो समय बचेगा ये समय इन्सान कही ओर निवेश कर सकता है.

 IoT के नुकसान (Disadvantage of Internet of Things in Hindi)

Data security 

IoT तकनीक लगातार जो  data को कलेक्ट (collect ) करती रहती है. वो data चोरी भी हो सकते है. उन data की सुरक्षा भी होनी जरूरी है. जैसे अगर आप घर से बहार, दूसरे शहर में 2 -3  दिन के लिये जाए. और Internet of Things ने पूरे घर को सुरक्षित किया. जो की पूरी तरह से data स्थानांतरण पर काम करता है.

अगर ये data चोरी हो जाता है तो चोर को पता चल जाएगा. कि आप घर पर नही है . चोर अपने मकसद में कामयाब हो सकता है.

Data security, IoT का बहुत जरूरी अंग है. इसके बिना IoT तकनीक को सफल नही माना जा सकता है.

Privacy issues

अब अगर मैं बिज़नेस (Business) करता हुं. और मैंने अपने पूरे ऑफ़िस में और कारखाने में IoT तकनीक का उपयोग किया है. Data लगातार स्थांतरित हो रहा है. जिसमे मेरे बिज़नेस की पूरी जानकारी है. कि मैं दिन में कितना उत्पादन करता हुं, मेरे ग्राहकों की जानकारी. कितने पैसों में उत्पाद  बेचता हुं और कितना लाभ कमाता हुं.

अगर ये data किसी विशुद्ध बुद्धि के हाथ लग जाए हो वो इसका गलत उपयोग कर सकता है. हो सकता है इतने data बहुत हो उसके लिये मेरे बिज़नेस को बर्बाद करने के लिये.

Privacy issues भी IoT का महत्पूर्ण अंग है. अगर IoT को सफल बनाना है तो इन बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है.

दोस्तों हमारी पूरी कोशिश रहती है कि हम आप तक संपूर्ण जानकारी बिल्कुल आसान भाषा में और ज्यादा से ज्यादा वास्तविक उदाहर्नो के साथ ले के आए. जिससे आपकी पढने में रूचि बनी रहे. मैं उम्मीद करता हुं आपको ये आर्टिकल पढने में मज़ा आया होगा.

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