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झंडा समिति के अध्यक्ष कौन थे | डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय

झंडा समिति के अध्यक्ष कौन थे | झंडा समिति क्या थी | डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय | Jhanda samiti ke adhyaksh kaun the – आजदी के बाद भारत को गणराज्य देश बनाने के लिए योजनाए शुरू की गई. क्योंकि कोई देश तभी गणराज्य देश होता हैं. जब उस देश का सर्वमान्य संविधान और राष्ट्र के प्रतीक हो. इसी समय भारत देश के राष्ट्रिय ध्वज को निर्धारित करने के लिए एक समिति बनाई गई. जिसे झंडा समिति कहते हैं. इस आर्टिकल में हम झंडा समिति तथा इसके अध्यक्ष के बारे में जानकारी प्राप्त करेगे.

झंडा समिति क्या थी?

सन 1946 में स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज निर्धारित करने के लिए एक समिति बनाई गई थी. जिसे झंडा समिति नाम दिया गया. इस समिति के सदस्यों ने कही महीनों तक बैठके की थी. तथा अनेक विचार विमर्श के बाद सबकी सहमति से आखिरकार 22 जुलाई 1947 को कांग्रेस के झंडे में बदलाव करके भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया.

पहले हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज में बीच में चरखा था लेकिन बाद में इसे बदल कर अशोक चक्र में परिवर्तित कर दिया गया.

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झंडा समिति के अध्यक्ष कौन थे | Jhanda samiti ke adhyaksh kaun the

झंडा समिति के अध्यक्ष भारत के प्रथम प्रधानमंत्री डॉ राजेंद्र प्रसाद थे. वह भारत के प्रथम राष्ट्रपति भी थे.

डॉ राजेंद्र प्रसाद का जन्म कब और कहा हुआ था?

डॉ प्रसाद जी का जन्म 3 दिसंबर 1884 में बिहार राज्य के सारण जिले के जीरादेई गांव में हुआ था.

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डॉ राजेंद्र प्रसाद कौन थे

डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति और भारत के स्वतंत्र संग्राम के प्रमुख नेता थे. उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी भूमिका दी है. इसके साथ ही प्रसाद जी ने भारतीय संविधान के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के राष्ट्रपति होने के साथ ही भारत के पहले मंत्रिमंडल में सन 1946 तथा 1947 में कृषि मंत्री और खाद मंत्री भी रहे हैं. डॉ राजेंद्र प्रसाद को सम्मान और प्यार से ‘राजेंद्र बाबू’ नाम से भी पुकारा जाता था.

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डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय

प्रसाद जी का जन्म 3 दिसंबर 1884 में बिहार के सारण जिले के जीरादेई गांव में हुआ था. उनके पिताजी का नाम महादेव सहाय था और माताजी का नाम कमलेश्वर देवी था. उनके पिताजी संस्कृत और फारसी के महान विद्वान थे और उनकी माताजी धार्मिक स्वाभाव की महिला थी.

डॉ राजेंद्र प्रसाद के पूर्वज मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी थे. तथा वह एक कायस्थ परिवार से आते हैं. चूँकि उनकी माताजी धार्मिक स्वभाव की महिला थी. अतः बचपन में ही राजेंद्र प्रसाद जी को रामायण और महाभारत तथा धार्मिक भजन आदि सुनाए जाते थे. 5 वर्ष की अल्पायु में ही राजेंद्र बाबू ने फ़ारसी भाषा में शिक्षा लेना शुरू कर दिया था. तथा अपनी प्रारंभिक शिक्षा के लिए उनको छपरा के जिला स्कूल भेजा गया.

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13 वर्ष की अल्पायु में ही उनका विवाह राजवंशी देवी से हो गया था. विवाह के पश्चात राजेंद्र बाबू ने पटना के टी० के० घोष अकादमी से अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखा. उनका विवाहिक जीवन, और कार्य अध्ययन सब कुछ बहुत आसानी से अच्छा चल रहा था.

लेकिन वह फिर से छपरा के जिला स्कूल में पढ़ाई करने के लिए आ गए और वहा से ही उन्होंने अपना ध्यान कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा की ओर लगाया. उन्होंने इस परीक्षा को प्रथम स्थान से पास किया. और सन 1902 में कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसिडेंट कॉलेज में दाखिला लिया. उस समय उनकी प्रतिभा पर गोपाल कृष्ण गोखले और अनुग्रह नारायण सिंह  जैसे विद्वानों की नजर पड़ी.

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राजेंद्र बाबू ने 1915 में स्वर्ण पदक हासिल करते हुए एलएलएम (LLM) की परीक्षा पास की और उसके पश्चात कानून के क्षेत्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की. डॉ राजेंद्र प्रसाद ने कानून की पढाई का अभ्यास बिहार के भागलपुर में किया.

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राजेंद्र बाबु का योगदान

डॉ राजेंद्र प्रसाद का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपने वकालत के शुरुआती दौर में ही पर्दापन हो गया था. वह गांधी जी के विचारों से बहुत प्रभावित थे. सन 1934 में प्रसाद जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुंबई अधिवेशन में अध्यक्ष चुने गए.

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद राजेंद्र बाबू एक बार फिर से सन 1939 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने. डॉ राजेंद्र प्रसाद अत्यंत गंभीर और सरल स्वाभाव के व्यक्ति थे. वह सभी वर्गों के लोगो के विचारों का सम्मान करते थे. वे प्रत्येक से अत्यंत स्नेह और निर्मल भावना से मिलते थे.

डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के राष्ट्रपति कब बने?

26 जनवरी 1950 को डॉ राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने. वह भारत के राष्ट्रपति के पद पर 14 मई 1962 तक पुरे बारह साल तक बने रहे. उसके बाद अवकाश प्राप्त करने के पश्चात उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया.

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निष्कर्ष

इस आर्टिकल (झंडा समिति के अध्यक्ष कौन थे | झंडा समिति क्या थी | डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय | Jhanda samiti ke adhyaksh kaun the ) को लिखने का हमारा उद्देश्य आपको झंडा समिति के बारे में विस्तार से जानकारी देना हैं. इस समिति का निर्माण भारत गणराज्य के राष्ट्रिय ध्वज को निर्धारित करने के लिए किया गया था. इस समिति के अध्यक्ष भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद थे. राजेंद्र बाबु को भारत के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया.

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