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नेपाल भारत से कब अलग हुआ | नेपाल का इतिहास

नेपाल भारत से कब अलग हुआ | Nepal bharat se kab alag hua tha | नेपाल का इतिहास – नेपाल देश कभी भी किसी का गुलाम नहीं रहा हैं. नेपाल सदैव एक स्वन्त्रत राज्य के रूप में रहा हैं. इसलिए नेपाल का कोई स्वंत्रता दिवस भी नहीं हैं. लेकिन 20 सितम्बर को नेपाल में संविधान लागु होने के उपलक्स में राष्ट्रिय स्वंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता हैं. इसी दिन सन 2015 ने नेपाल धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया था. नेपाल 2008 तक अंतिम हिन्दू राष्ट्र बना रहा था. इस देश का इतिहास बहुत गौरवपूर्ण रहा हैं.

लेकिन आपको पता हैं की नेपाल और भारत के बिच प्राचीन काल में कैसे सम्बन्ध थे. नेपाल और भारत इतने पास होते हुए भी अलग देश कैसे हैं. या नेपाल भारत के कैसे और कब अलग हुआ. तो इस आर्टिकल में हम आपको नेपाल के इतिहास में लेके जाएँगे. और बताएगे की भारत राजनीती का नेपाल पर क्या प्रभाव रहा हैं.

नेपाल का इतिहास | history of nepal in hindi | नेपाल भारत से कब अलग हुआ

नेपाल ही एक ऐसा देश था. जो ब्रिटिश उपनिवेशवाद से बचा रहा था. नेपाल कभी भी किसी देश का गुलाम नहीं रहा था. नेपाल की राजनीती पर शुरू से भारतीय साम्राज्यों का प्रभाव रहा हैं. काठमांडो उपत्यका के अनुसार हिमालय क्षेत्र में इन्सान का आगमन की पुष्टि 1000 साल पुर्व से मिलती हैं.

1500 ई. पु. के आसपास इंडो-आर्यन जातियों ने नेपाल तथा काठमांडू में प्रवेश करना शुरू कर दिया था. करीब 1000 ई. पु. में नेपाल में छोटे-छोटे राज्य और राज्य संगठन बनना शुरू हो गए थे. नेपाल प्राचीन काल सभ्यता, संस्कृति और शौर्य की दृष्टि से बड़ा गौरवपूर्ण रहा है. प्राचीन काल में नेपाल की भागदौड़ गुप्तवंश, सोमवंश, सूर्यवंश, लिच्छवी वंश जैसे भारतीय साम्राज्यों के हाथों में रही थी.

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इन साम्राज्यों के राज्य काल बड़े गौरवपूर्ण रहें. लिच्छवि काल नेपाल राज्य का कला, शिक्षा, वैभव और राजनीती की दृष्टिकोण से स्वर्ण युग रहा है. उस समय जनसाधारण संस्कृत भाषा में लिखते और बोलने में समर्थ थे. राजा स्वंय विद्वान और संस्कृत भाषा का ज्ञानी होता था.

880 ई सन में लिच्छवि वंश की समाप्ति पर नेपाल में मल्ल राजाओ का आगमन हो गया था. इस समय नेपाल में केंद्र शासन समाप्त होने लगा. नेपाल काठमांडो, गोरखा, मकाबानकुर, और तनहू जैसे छोटी रियासतों में परिवर्तित हो गया.

नेपाल की छोटी-छोटी राजनीतिक इकाईयो पर गोरखा राज्य का प्रभाव छा गया था. न्यायमूर्ति राजा राम शाह के न्याय की चर्चा पुरे नेपाल में होने लगी थी. गोरखा बड़े बहादुर और शातिर लोग होते हैं. उन्होंने बंगाल के नवाब गुर्गिन खाँ के नेतृत्व में नेपाल पर आक्रमण करने आए. सैनिकों को गाजर मूली की तरह काट दिया था. गोरखा राज्य में नेपाल के लोगो का जनजीवन सुखद चल रहा था.

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मध्यकालीन नेपाल के अंतिम चरणों में मल्ल राजाओं के आपसी झगड़ों तथा देवी देवताओं के मंदिर की संपत्ति का निजी उपयोग करने से नेपाल की राजनीति पर बुरा असर पड़ा था. इसके साथ ही जनता का विश्वास भी धीरे-धीरे कम हो रहा था. इसी समय नेपाल में पादरी ईसाई धर्म का प्रचार करने लगे थे.

आधुनिक काल में नेपाल अपने आसपास ब्रिटिश भारतीय राज्य के छोटे-छोटे रियासतों को हड़पना चाहता था. और इसी कारण नेपाल की ब्रिटिश साम्राज्य के साथ दुश्मनी हो गई थी. सन 1814 से लेकर 1816 तक ब्रिटिश और नेपाल सैनिकों के बीच में भयंकर लड़ाईया हुई. इसमें नेपाल को हार का सामना करना पड़ा.

आखिरकार नेपाल ने ब्रिटिश साम्राज्य के साथ सिगौली संधि की और इस संधि के तहत नेपाल का बहुत बड़ा भूभाग ब्रिटिश भारत में चला गया. संधि के तहत प्राप्त भूभाग आज के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और पश्चिमी बंगाल राज्य का हिस्सा हैं. संधि के तहत ब्रिटिश ने नेपाल को सुरक्षा देने की घोषणा की थी. लेकिन उसे एक स्वतंत्र देश मानने के लिए तैयार हो गया. इस समय काठमांडू में अंग्रेजी रेजिडेंस की स्थापना भी की गई.

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इस प्रकार नेपाल हमेशा एक स्वन्त्रत राष्ट्र बना रहा. नेपाल के सम्बन्ध वर्तमान में अपने पडोसी देशो के साथ भी अच्छे हैं. नेपाल कभी भारत का हिस्सा नहीं रहा हैं. नेपाल एक प्रथक राष्ट्र के रूप में हमेशा से ही अस्तित्व में रहा हैं.

निष्कर्ष

इस आर्टिकल (नेपाल भारत से कब अलग हुआ | नेपाल का इतिहास) को लिखने का हमारा उद्देश्य आपको नेपाल के इतिहास के बारे में विस्तार से बताना हैं. नेपाल एक ऐसा देश रहा हैं. जो कभी भी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा नहीं बना. बल्कि संधि के तहत ब्रिटिश ने नेपाल की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली थी. नेपाल के गोरखा जाति के लोग आज भी शौर्य और बहादुरी के जाने जाते हैं. प्राचीन भारतीय साम्राज्यों का नेपाल पर बहुत प्रभाव था. लेकिन नेपाल भारत का हिस्सा कभी नही रहा हैं. इसके साथ ही सिगौली संधि की तहत नेपाल का बहुत बड़ा भूभाग ब्रिटिश भारत में चला गया था.

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