सबसे पुराना वेद कौन सा हैं – सबसे प्राचीन वेद कौन सा हैं

सबसे पुराना वेद कौन सा हैं – सबसे प्राचीन वेद कौन सा हैं – (sabse purana ved kaun sa hai – sabse prachin ved kaun sa hai) –  वेद हिन्दू और सनातन धर्म के आधारशीला हैं. प्राचीन काल में सिर्फ एक ही वेद था. लेकिन जब द्वापर युग ख़त्म हुआ और कलयुग शुरू हुआ था. तो एक समस्या यह थी की एक ही वेद के विस्तृत जानकारी को कलयुग में समझना असंभव था. अंत ऋषियों की बात को मानकर वेदव्यास जी ने एक वेद के चार भाग कर दिए. इस आर्टिकल में हम सबसे प्राचीन वेद के बारे में जानकारी दे रहे हैं.

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सबसे पुराना वेद कौन सा हैं – सबसे प्राचीन वेद कौन सा हैं – (sabse purana ved kaun sa hai – sabse prachin ved kaun sa hai)

सबसे पुराना वेद ऋग्वेद हैं. ऋग्वेद से ही अन्य सभी वेदों का निर्माण हुआ हैं. ऋग्वेद हिन्दू धर्म का आधारशीला हैं. यह विश्व और हिन्दू धर्म का पहला धर्म ग्रन्थ हैं. यूनेस्को ने ऋग्वेद की 30 पांडुलिपिया सास्कृतिक धरोहर में शामिल की हैं. ऋग्वेद की रचना सृष्टि से पहले की मानी जाती हैं. ऐसा माना जाता हैं की जब कलयुग प्रारम्भ हुआ उससे पहले वेदव्यास ने वेदों की रचना कर दी थी.

ऋग्वेद की रचना विभिन्न कालो में हुई होगी. क्योंकि यह सिर्फ एक विषय पर आधारित नहीं हैं. अपितु विभिन्न विषयो पर विस्तृत रूप से ज्ञान ऋग्वेद में मंत्रो और पद्यो के रूप में मौजूद हैं. ऋग्वेद में देवतओं के आवाहन, स्तुति और प्रार्थना के लिए मन्त्र हैं. इस वेद में देवतओं की भौगोलिक स्थिति का भी वर्णन हैं. इसके साथ ही विभिन्न चिकित्सा प्रणाली जैसे वायु, सौर, अग्नि, जल आदि के बारे में जानकारी और चिकित्सा से जुडी विधिया प्राप्त होती हैं.

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ऋग्वेद की परिभाषा

ऋग्वेद शब्द में ऋक का अर्थ स्थिति और ज्ञान से हैं. ऋग्वेद अर्थात ऐसा ज्ञान जो ऋचाओं में बंद हो.

ऋग्वेद की जानकारी

ऋग्वेद में कुल 10 अध्याय हैं. तथा इन अध्यायों में कुल 1028 सूक्त हैं. जिसमे 10,580 मन्त्र हैं. प्रथम और अंतिम अध्यायों में प्रत्येक में 191 सूक्त हैं. आठवे और प्रथम अध्याय के प्राम्भिक 50 सूक्त एक समान हैं. दुसरे अध्याय से लेकर सातवे अध्याय का अंश ऋग्वेद का सर्वश्रेष्ठ भाग हैं.

इसके नवा अध्याय सभी आठो अध्यायों का संग्रह हैं. तथा दसवे अध्याय में प्रथम अध्याय के सूक्तियो का परिवर्तित रूप हैं. अंतिम अध्याय आयुर्वेद से सम्बंधित हैं. जिसमे 125 औषधि का ज्ञान प्राप्त होता हैं. 107 औषधि प्राप्त करने के स्थानों का भी वर्णन मिलता हैं. ऋग्वेद की स्तुतिया अग्नि, वायु, सविता, सूर्य, ऊर्जा, इंद्र और देवतओं को समर्पित हैं. इस प्रकार से ऋग्वेद में कुल 33 देवी-देवतओं का उल्लेख हैं.

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इस वेद में 25 नदियों का उल्लेख मिलता हैं. जिसमे सिन्धु, सरस्वती, गंगा और यमुना नदी का मुख्यरूप से उल्लेख मिलता हैं. सबसे ज्यादा सिन्धु नदी का उल्लेख मिलता हैं. ऋग्वेद में सरस्वती नदी को सबसे पवित्र माना गया हैं. तथा गंगा और यमुना नदी का भी उल्लेख मिलता हैं. ऋग्वेद में राजा के राज्य अभिषेक की विधि की भी व्याख्या मिलती हैं. ऋग्वेद के अनुसार राजा का पद वंशानुगत होता हैं.

ऋग्वेद की शाखाए

ऋग्वेद की 5 शाखाए हैं. जिसके नाम शाकल्प, वास्कल, अश्वलायन, शांखायन, और मंडूकायन हैं.

ऋग्वेद का उपवेद आयुर्वेद हैं. उपवेद वेद का भाग होता हैं. आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि हैं.

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निष्कर्ष

ऋग्वेद को वेदों का वेद कहा जाता हैं. और ऋग्वेद से ही बाकि तीनो वेदों की उत्पत्ति हुई हैं. वेदों में विभिन्न विषयों पर ज्ञान हैं. जिसे एक सामान्य मनुष्य के द्वारा समझना असंभव हैं. वेदों में अलौकिक शक्ति, रहस्यमय शक्ति, ब्रह्माण्ड, आत्मा और परमात्मा से सम्बन्धित ज्ञान मिलता हैं. इस आर्टिकल में हमने सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद के बारे में विस्तार से जानकारी दी हैं.

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