Ramanand ke shishya kaun the – स्वामी रामानंद के शिष्य कौन थे-उनके नाम

Swami Ramanand ke shishya kaun the – ramanand ke shishya ka kya naam tha – स्वामी रामानंद के शिष्य कौन थे -उनके नाम – स्वामी रामानादं का जन्म तब हुआ था जब भारत समाज बाबर और तैमुर के आक्रमण से तंग आ चूका था. यह वह काल था जब धर्म में बहुत बड़ा अन्धकाल छा गया था. इस समय समाज और लोगों के बिच में अनेक अन्धविश्वास जन्म ले रहे थे. और धर्म कमजोर हो गया था. स्वामी रामानंद ने धर्म को फिर जागृत करने का कार्य किया.

swami-ramanand-ke-shishya-kaun-the-unke-naam

स्वामी रामानंद ने राम और कृष्ण भक्ति के माध्यम से समाज को जागृत किया और समाज को धर्म का रास्ता दिखाया. स्वामी रामानादं ने समाज में उपस्थित अन्धविशावसो और उच-नीच जैसी कुरतियो का खंडन किया. उन्होंने अपने ग्रन्थ श्री वैष्णवमताज भास्कर में उच्च नीच की बुरी भावनाओ का कुर रूप से खंडन किया.

स्वानी रामानंद ने समाज में वैष्णव गुरुओ के आत्मसम्मान को फिर से दिलाया. स्वामी रामानंद भक्ति मार्ग के बहुत बड़े संत थे. क्रातिकारी कबीर और तुलसीदास भी रामानादं स्वामी का अनुसरण अपनी रचनाओ में करते थे.

Ashok kis vansh ka shasak tha – चक्रवर्ती अशोक सम्राट

स्वामी रामानंद का प्रारंभिक

स्वामी रामानंद का का जन्म सन 1236 में हुआ था. रामानंद के जन्म स्थान की पूरी जानकारी मौजूद नहीं हैं. कुछ शोधकर्ताओ का मानना हैं की रामानंद का जन्म इलाहबाद के कान्यकुब्ज परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम पुण्यसदन और माता का नाम सुशीला था. माताजी शुरू से ही भक्तिभाव की थी. और रोजाना वेणीमाधव भगवान की पूजा करती थी. एक दिन जब माता मंदिर से बहार आ रही थी. तभी आकाशवाणी हुई की ‘यह माता पुत्रवती हो.’

एक दिन माता ने देखा की आकाश में प्रकाश पुंज जा रहे हैं. एक प्रकाश पुंज माँ के मुह में समा गया. उसके बाद में माँ को अपने अन्दर शक्ति होने का अहसास रहने लगा. एक दिन शुष्लग्न में प्रात: काल रामानन्द आचार्य का जन्म हुआ. इसकी खबर आसपास पुरे नगर में फैल गई. कुलपुरोहित ने बच्चे का नाम ‘रामानादं’ रखा.

swami-ramanand-ke-shishya-kaun-the-unke-naam-1

जब रामानादं छोटे थे. तब बालक रामानंद के पास एक तोता आता था. जो राम-राम की ध्वनि निकालता था. यही राम-राम के शब्द रामानादं के जीवन के आधार बन गए. पांच साल की उम्र में पिता ने बालक रामानंद को कुछ ग्रंथो के शलोक सिखाए तो बालक ने तुरंत सिख लिए.

एक बार प्रयाग कुम्भ में विध्दानों का मेला लगा. जहा बालक रामानंद भी पहुचे. जब बालक रामानंद के अपने विचार रखने की बारी आई. तो उन्होंने कहा – ‘जैसे कमल के पत्तो पर पानी की बूंद लटकती हैं. ठीक वैसे ही संचार में इन्सान हैं. पता नहीं कब जाने की बारी आ जाए. अंत सब वाद-विवाद को छोड़ कर भगवान की भक्ति में समय लगाना चाहिए.’ इससे वहा पर बैठे विध्द्वानो ने बालक रामानंद के विचारों की पसन्नसा की और आरती की.

Ibn battuta kis desh ka yatri tha – इन्ब बत्तुता जीवन परिचय

स्वामी रामानंद की दीक्षा

बालक रामानंद ने बहुत ही काम उम्र मात्र आठ साल में दीक्षा ली. स्वानी रामानंद ने वाराणसी में स्थित पंच घाट के स्वामी राघवानंदाचार्यजी से दीक्षा ली. कठिन तपस्या और गुरु से अर्जित शिक्षा के बाद स्वानी रामानादं में इतना तेज आ गया था की बड़े-बड़े विद्वान उनसे भक्ति मार्ग के ज्ञान के लिए आते थे.

रामानंद के शिष्य कौन थे -उनके नाम (swami ramanand ke shishya kaun the)

स्वामी रामानंद के कुल बाहरह शिष्य थे. जिनके नाम निन्लिखित हैं:

क्रमांक शिष्यों के नाम किसके अवतार थे
1.संत अनंतानंदब्रह्मा ही के अवतार
2.संत सुखानंदशंकर जी के अवतार
3.सुरासुरानंदभगवान नारद जी के अवतार
4.नरहरीयानंदसनत्कुमार जी के अवतार
5.योगानंदकपिलदेव जी के अवतार
6.पिपानंदमनु जी के अवतार
7.संत कबीरदासप्रहाद जी के अवतार
8.संत सेजान्हावीभीष्म के अवतार
9.संत धन्नाराजा बलि जी के अवतार
10.संत रविदासधर्मराज जी के अवतार
11.भावानन्दजनक के अवतार
12.गालवानंदशुक्रदेव के अवतार

लोकतंत्र किसे कहते हैं? (loktantra kise kahate hain) – लोकतंत्र की परिभाषा

जनसंचार किसे कहते हैं – जनसंचार के माध्यमों के प्रकार

निष्कर्ष

स्वामी रामानंद एक महान धर्म सुधारक थे. जिन्होंने अपने पुरे जीवन को धर्म की रक्षा के लिए लगा दिया था. आज भी जब महाकुम्भ का आयोजन होता हैं तो सबसे पहले 13 अखाड़े जाते हैं. जिस में से तीन रामानंद पीठ और वैष्णवों के अखाड़े जाते हैं. इन तीन अखाड़ो का नाम निर्मोही, दिगंबर और निर्वाणी हैं. तुलसीदार और कबीर दास जैसे महान संत भी स्वामी रामानंद के शिष्य माने जाते हैं.

इस आर्टिकल (Swami Ramanand ke shishya kaun the – ramanand ke shishya ka kya naam tha – स्वामी रामानंद के शिष्य कौन थे?) को लिखने का हमारा उद्देश्य आपको महान धर्म सुधारक स्वामी रामानादं के जीवन यात्रा के बारे में परिचय देना हैं.

2 thoughts on “Ramanand ke shishya kaun the – स्वामी रामानंद के शिष्य कौन थे-उनके नाम”

Leave a Comment

x