History of Internet in Hindi Language? www का आविष्कारक किसने किया?

History of Internet in Hindi Language

दोस्तों इस आर्टिकल हम आपको जानकारी देने वाले है History of Internet language  के बारे में. हमने पूरी कोशिश की है कि आपको सरल से सरल भाषा में  History of Internet in Hindi language में जानकारी मुहैया कराए.

Internet का इतिहास क्या है? (History of Internet in Hindi Language)

इन्टरनेट के विकास की कहानी बहुत लम्बी है. हम internet के अविष्कार का श्रेय किसी एक आदमी या संसथान को नही दे सकते है. इसमें कही सालो के परीक्षण लगे है. और कही वैज्ञानिको, computer प्रोग्रामर और गणितज्ञो ने अपने प्रयोग की है. फिर भी हम ने internet के विकास की कहानी निचे दिए गए बिंदु में विभाजित कर. आपको आसानी से समझानी की कोशिश की है.

अमेरिका Vs सोवियत संघ शीत युद्ध

1950 के बाद से ही सोवियत संघ और यूनाइटेड स्टेट अमेरिका के बीच शीत युद्ध चरम पर पहुँच चुका  था. अमेरिका और सोवियत संघ के बीच लगातार तकनीक और ताकत को विकसित करने की होड़ चल रही थी.

ARPA

7 फरवरी, 1958 में अमेरिका के रक्षा सचिव Neil McElroy ने एक ऐसे प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये जिससे Advanced Research Projects Agency (ARPA) अस्तित्व में आई.

जिसको आज हम Defense Advanced Research Projects Agency (DARPA) के नाम से जानते है. इसे तकनीक और विज्ञान पर काम करने और इसे तेज गति से आगे बढ़ाने के लिये बनाया गया था.

Sputnik उपग्रह

October 4, 1957 के दिन सोवियत संघ ने सबसे पहला इंसानों द्वारा बनाया गया Sputnik उपग्रह (satellite) अंतरिक्ष में सफ़र पूर्वक स्थापित किया.  

इससे अमेरिका सोवियत संघ की तकनीकी ताकत से घबराया हुआ था. अमेरिका इस चिंता में भी था कि कही सोवियत संघ अंतरिक्ष से हमला नही कर दे.

History of internet in hindi language
SPUTNIK

ARPnet

अभी तक का national defence network सिस्टम टेलीफ़ोन के तारों के सहारा था. जिसे कभी भी नष्ट किया जा सकता था. तो इस समय एक ऐसे network सिस्टम की जरूरत थी. जिसे नष्ट करना असंभव हो.

इसके लिये सन 1962 में वैज्ञानिक J.C.R. Licklider जो ARPA and MIT में कार्यरत थे, उन्होंने ने एक ऐसे नेटवर्क का सुझाव दिया. जिसे बाद में ARPnet नाम दिया गया.

ARPnet packing swithching तकनीक पर आधारित था. Packing swithching तकनीक में data को भेजने से पहले ब्लाक or पैकेट में तोड़ जाता  है. प्रत्येक पैकेट का स्थान्तरण का अपना एक रास्ता होता था.

History of internet in hindi language
ARPnet

LOGIN

29 अक्टूबर, 1969 को ARPnet ने अपना पहला संदेश भेजा। जो रिसर्च लैब UCLA से Stanford तक था. संदेश में लिखा था. “LOGIN” जो बहुत ही छोटा संदेश था लेकिन दुर्घटना होने के कारण से सिर्फ “LO” शब्द ही पहुँच पाया था.

सन 1969 के अंत तक ARPnet नेटवर्क में चार कंप्यूटर को आपस में जोड़ा गया. इसके बाद इसको लगातार विकसित किया गया.

सन 1971 में इसमें University of Hawaii को जोड़ा गया और दो साल के बाद  London’s University College and the Royal Radar को ARPnet नेटवर्क में जोड़ा गया.

IP or TCP

लेकिन अभी भी इसको पूरी दुनिया से जोड़ने में कही दिक्कतें थी. सन 1970 के अंत तक वैज्ञानिक Vinton Cerf ने इस समस्या का निष्कासन किया. और इस आविष्कार को “Transmission Control Protocol” या TCP नाम दिया. जिसे आज हम IP (Internal  Protocol) कहते है.

Transmission Control Protocol से दुनिया भर के कंप्यूटर को आपस में जोड़ा गया और प्रत्येक कंप्यूटर का अपना एक IP or TCP address होता है. जिससे एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से अलग से पहचान network में मिल सकी.

World Wide Web

वैज्ञानिक Vinton Cerf के आविष्कार के बाद internet का उपयोग वैज्ञानिको को द्वारा बढ़ने  लगा. वो लोग इसे फाइल भेजने और लेने में उपयोग करते थे.

सन 1991 में internet में एक क्रांति बदलाव आया. स्विट्ज़रलैंड के कंप्यूटर प्रोग्रामर Berners-Lee ने web का परिचय कराया. अब सिर्फ फाइल को भेजने और लेने के अलावा भी web पर फाइल रख सकते है. जिसे कोई भी जरूरत के हिसाब से उपयोग कर सकता है. ये वही वेबसाइट है जो आज हम चलाते है.

Mosaic

इसके बाद सन 1992 में Illinois के वैज्ञानिको और छात्रों ने मिलकर एक ब्राउज़र बनाया. जिसे Mosaic नाम दिया गया.

जिस पर एक ही पेज पर बहुत सारे शब्द या फोटो देखे जा सकते थे. उस समय का यह काफी सफ़र परीक्षण था.

उसी साल सन 1992 में अमेरिकी संसद  ने इंटरनेट (ARPnet) को व्यावसायिक (commercial) उपयोग के लिये देने की घोषणा कर दी. उसके बाद बड़ी बड़ी कंपनी की अपनी website बनाने की होड़ शुरू हुई. कही ऑनलाइन बाज़ार अस्तित्व में आए. कही entrepreneur ने जन्म लिया और ये अभी निरंतर चल रहा है.

दोस्तों हमारी पूरी कोशिश रहती है कि हम आप तक संपूर्ण जानकारी बिल्कुल आसान भाषा में ले के आए. जिससे आपकी पढने में रूचि बनी रहे. मैं उम्मीद करता हुं आपको ये आर्टिकल पढने में मज़ा आया होगा.

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