कोलकाता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना कब हुई थी | प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन थे

कोलकाता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना कब हुई थी | कोलकाता उच्च न्यायालय की स्थापना कब की गई थी | kolkata mein sarvoch nyayalaya ki sthapna kab hui thi | कोलकाता उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन थे – किसी भी देश की शासन व्यवस्था को चलाने के लिए वहा के न्यायलय का मुख्य हाथ होता है. न्यायलय की प्रक्रिया और अधिकारों से ही यह मामुल चलता है की देश के नागरिको को कितने स्वत्रता और अधिकार प्राप्त है. अगर किसी देश की न्याय व्यवस्था में शासको या वहा की सरकार का खिलवाड़ होता है. तो वह देश सही मायनो में लोकतान्त्रिक नहीं हो सकता है.

ब्रिटिश काल में भी ब्रिटिश कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और धार्मिक स्वंत्रता के लिए ब्रिटिश सरकार ने हमारे देश में न्यायलयो की स्थापना की थी. इस आर्टिकल में हम ब्रिटिश सरकार द्वारा स्थापित कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय के बारे में जानकारी प्राप्त करेगे. और जानेगे की कोलकाता सर्वोच्च न्यायालय की स्थापन कब हुई थी और इसको क्या-क्या अधिकार प्राप्त थे.

kolkata-mein-sarvoch-nyayalaya-ki-sthapna-kab-hui-gai-thi-pratham-nyaydhish-1

कोलकाता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना कब हुई थी | कोलकाता उच्च न्यायालय की स्थापना कब की गई थी | kolkata mein sarvoch nyayalaya ki sthapna kab hui thi

इंग्लैंड के सम्राट को रेगुलेटिंग एक्ट 1773 के अनुसार कोलकाता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना करने का अधिकार प्राप्त हुआ था. जिसके जरिये इंग्लैंड के सम्राट जार्ज द्वितीय ने चार्टर जारी करके 26 जुलाई 1774 को कोलकाता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना की. यह न्यायलय एक अधिलेख न्यायलय थी. अर्थात मुकदमो से जुड़े सम्पूर्ण अभिलेख इस न्यायलय में रखे जाते थे.

कृषि किसे कहते है | krishi kise kahate hain | कृषि के प्रकार का वर्णन करें

इस न्यायलय में उस समय एक मुख्य न्यायाधीश और तिन अन्य न्यायधिशो की नियुक्ति की गई थी. तथा इन पदों पर नियुक्ति के लिए इंग्लैंड में बैरिस्टरी का कम से कम पांच साल का अनुभव होना अनिवार्य था. न्यायधिशो के कार्यकाल की अवधि सम्राट निर्धारित करते थे. तथा सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश को निर्णायक मत देनी की शक्ति प्राप्त थी.

सर्वोच्च न्यायालय में एक सपरिषद गवर्नर का पद होता था. जिसका मुख्य कार्य न्यायलय के द्वारा लिए गए आदेशो को निष्पादन करना और  न्यायलय द्वारा वाछित व्यक्तियों को न्यायलय में बंदी बना के रखना था.

मानव पूंजी निर्माण में शिक्षा की क्या भूमिका है | मानव पूंजी क्या है

कोलकाता उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन थे

कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय का सर्वप्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे को बनाया गया था. और तीन अन्य न्यायधिशो में स्टीफनम, चैम्बर और जान हाइड को पद प्राप्त हुआ था.

कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय को क्या अधिकार पाप्त थे? कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय के अधिकार

सर्वोच्च न्यायलय को सभी प्रकार के अपराधिक, दीवानी, धार्मिक, नवाधिकरण मामलो पर सुनवाई और निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त था. कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय के निर्णय की अपील किंग ऑफ़ काउन्सिल में की जा सकती थी. न्यायलय के न्यायधिशो को किंग बैच के न्यायधिशो के बराबर दर्जा दिया जाता था.

संचारी भाव की संख्या कितनी है | sanchari bhav ki sankhya kitni hai

कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय बिहार, बंगाल और उड़ीसा के ब्रिटिश प्रजाजनों के धार्मिक मामलो को इंग्लैंड के प्रचलित विधियों के अनुसरण करके निर्णय दे सकता था. वसीयत से जुड़े संपत्ति वाले मामलों में प्रोबेट और गैर-वसीयत वाले मामलों में प्रशासन पत्र जारी करके सम्पत्ति से जुड़े मामलों का निष्पादन कर सकता था.

kolkata-mein-sarvoch-nyayalaya-ki-sthapna-kab-hui-gai-thi-pratham-nyaydhish-2

सर्वोच्च न्यायलय बिहार, उड़ीसा और बंगाल के समुद्री क्षेत्र में होने वाले नौकाधिकरण के मामले सुनकर और निर्णय सुना सकता था. लेकिन कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय को मृत्यु दंड  जैसे कठिन फैसलों में क्राउन की अनुमति प्राप्त करनी होती थी. किंग ऑफ़ काउसिल के परामर्श पर मृत्यु दंड को निलंबित भी किया जा सकता था. तथा मृत्यु दंड के स्थान पर अन्य सजा दी जानी भी संभव थी.

किसने कहा कि संविधान के बिना कोई राज्य नहीं हो सकता | संविधान की विशेषताए

कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय के न्यायधिशो को देशद्रोह और अन्य गंभीर आरोपों के अलावा बंदी नहीं बनाया जा सकता था. सर्वोच्च न्यायलय को साम्य न्यायलय के भांति इंग्लैंड के हाई कोर्ट ऑफ़ चांसरी के समान ही अधिकार प्राप्त थे. तथा बंगाल, उड़ीसा और बिहार के हिंज मैजेस्टी की जनता, कर्मचारी और कर्मचारी के विरोध सुनवाई की शिकायत की कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय को प्राप्त थी.

कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय की न्यायिक प्रक्रिया कैसी थी?

सर्वोच्च न्यायालय को मामलो की सुनवाई और निर्णय लेने के सम्बंधित प्रक्रिया को बनाने का अधिकार प्राप्त था. जिसे सम्राट स्वीकार और अस्वीकार भी कर सकता था. न्यायलय को इंग्लैंड के प्रचलित नियमो का अनुसरण करने और जरूरत पड़ने पर प्रचलित प्रक्रियाओ में बदलाव करने का अधिकार प्राप्त था.

सर्वोच्च न्यायलय के निर्णय के मामले जो 1000 मुद्रा से अधिक दण्डित थे. उनकी की अपील 6 महीने के भीतर किंग ऑफ़ काउंसिल में की जा सकती थी.

मातृभूमि से आप क्या समझते हैं | हमारी मातृभूमि भारत इतनी वन्दनीय क्यों है

निष्कर्ष

इस आर्टिकल (कोलकाता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना कब हुई थी | कोलकाता उच्च न्यायालय की स्थापना कब की गई थी | kolkata mein sarvoch nyayalaya ki sthapna kab hui thi | कोलकाता उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन थे ) को लिखने का हमारा उद्देश्य आपको कोलकाता सर्वोच्च न्यायलय के बारे में जानकरी देना है. इंग्लैंड के सम्राट को रेगुलेटिंग एक्ट 1773 के अनुसार कोलकाता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना करने का अधिकार प्राप्त हुआ था. जिसके जरिये इंग्लैंड के सम्राट जार्ज द्वितीय ने चार्टर जारी करके 26 जुलाई 1774 को कोलकाता में सर्वोच्च न्यायलय की स्थापना की थी.

वयस्क मताधिकार / सार्वभौमक मताधिकार क्या है | पक्ष और विपक्ष के तर्क

किसने कहा कि संविधान के बिना कोई राज्य नहीं हो सकता | संविधान की विशेषताए

रूसो किस सिद्दांत का समर्थक था | ruso kis siddhant ka samarthak tha

आपको यह आर्टिकल कैसा लगा हैं. यह हमे तभी पता चलेगा जब आप हमे निचे कमेंट करके बताएगे. यह आर्टिकल विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओ की दृष्टी से भी महत्वपूर्ण हैं. इसलिए इस आर्टिकल को उन लोगो और दोस्तों तक पहुचाए जो प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. क्योंकि ज्ञान बाटने से हमेशा बढ़ता हैं. धन्यवाद.

Leave a Comment

x