पृथ्वीराज चौहान की तलवार का वजन कितना था

पृथ्वीराज चौहान की तलवार का वजन कितना था | पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु कैसे हुई थी | पृथ्वीराज चौहान का जन्म कब हुआ था – भारतवर्ष में ऐसे अनेक राजा हुए. जिन्होंने अपना नाम इतिहास में दर्ज करवाया हैं. इन राजाओ ने भारत की संस्कृति और विरासत को बाहरी दुष्ट लुटेरो से बचाने के लिए अपने प्राण तक निछावर कर दीए. इनमे से एक महान राजा पृथ्वीराज चौहान हैं. पृथ्वीराज चौहान को एक सम्राट और महान योध्दा के रूप में याद किया जाता हैं. इस आर्टिकल में हम जानेगे की पृथ्वीराज चौहान कौन थे. उनका इतिहास क्या था. इनकी मृत्यु कैसे हुए. तथा पृथ्वीराज चौहान के तलवार का वजन कितना था.

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महाराज पृथ्वीराज चौहान कौन थे?

पृथ्वीराज राज चौहान एक हिन्दू सम्राट थे. जिन्होंने इतिहास में अनेक युध्द जीते थे. पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही युध्द कला में अव्वल थे. जब वह 11 साल के थे. तभी उनके पिताजी की मृत्यु हो गई थी. उन्होंने मात्र 11 वर्ष के अल्पआयु में अपने पिताजी की विरासत और राज गद्दी संभाल ली थी. अपने समय में उन्होंने अनेक युद्ध जीते थे. पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी के साथ अनेक बार युध्द किया. और प्रत्येक बार माफ़ करके छोड़ दिया.

पृथ्वीराज चौहान का जन्म कब हुआ था

पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1178 में अजमेर में हुआ था. उनके पिताजी का नाम महराजा सोमेश्वर और माता जी का नाम कपूरी देवी था. उनका जन्म उनके माता पिता के विवाह से 12 साल बाद हुआ था. राज गद्दी के लालच में उनके अपनों ने उन्हें मारना का बहुत प्रयास किया लेकिन कोई सफल नहीं हो पाया. पृथ्वीराज चौहान बचपन में ही शब्दभेदी बाण चलाना सिख गए थे.

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पृथ्वीराज चौहान की तलवार का वजन कितना था?

पृथ्वीराज चौहान के कवच, ढाल और तलवार को मिलाकर कुल वजन 207 किलोग्राम था.

पृथ्वीराज चौहान की रानिया

पृथ्वीराज चौहान की 13 रानिय थी. जिसमे से रानी संयोगिता के साथ उनका प्रेम आज भी प्रसिध्द हैं. संयोगिता के पिता का नाम जयचंद्र था. जयचंद्र पृथ्वीराज चौहान से घृणा करते थे. और उन्हें निचा दिखाना का कोई मौका नहीं छोड़ते थे. ऐसा उन्होंने संयोगिता के स्वयंवर में भी किया. जयचंद्र ने सिर्फ पृथ्वीराज चौहान को छोड़ करके आस-पास के सभी राजकुमारों और राजाओ को स्वयंवर में आमत्रित किया.

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लेकिन संयोगिता के इच्छा के अनुसार पृथ्वीराज चौहान भरी महफिर में आए और संयोगिता का अपरहण करके दिल्ली ले गए. जहा उन्होंने संयोगिता के साथ विवाह किया. जिससे पृथ्वीराज और संयोगिता के पिता जयचंद्र के बिच दुश्मनी ज्यादा बढ़ गई थी.

पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु कैसे हुई थी?

पृथ्वीराज चौहान के समय ही मोहम्मद गौरी अपने शासन और धर्म के विस्तार के लिए छल और बल से अनेक जनपदों  को हड़प्प रहा था. इसी बिच मोहम्मद गौरी का सामना पृथ्वीराज चौहान से हुआ. चूँकि मोहम्मद गौरी ने बिना युद्ध किए पंजाब के भटिंडा में शासन कर रहा था. जो अमान्य था. जिसे रोकना अनिवार्य था. अंत पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी पर आक्रमण किया. इस युध्द में पृथ्वीराज चौहान की विजय हुई थी.

इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने हांसी, सरस्वती और सरहिंद पर अपना कब्ज़ा जमा लिया. इस युध्द में उन्होंने 7 करोड़ की संपदा हासिल की थी. जिसे उन्होंने अपने सैनिको के बिच में बाट दिया. इसके बाद जयचंद्र ने मोहम्मद गौरी का साथ दिया. और अन्य राजपूत राजाओ को भी पृथ्वीराज के खिलाफ भड़काया. द्वितीय युद्ध में मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज और उनके मित्र चंदबरदाई को बंदी बनाया.

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पृथ्वीराज और चंदबरदाई को बंदी बना कर दील्ली ले जाया गया. तथा वहा पर पृथ्वीराज चौहान की आँखों को फोड़ दिया गया. तथा दोनों मित्रो को मोहम्मद गौरी के दरबार में पेश किया गया. गौरी ने पृथ्वीराज से अंतिम इच्छा पूछे. चौहान ने कहा की “मैं अंतिम बार शब्दभेदी बाण चलाना चाहता हु.” चूँकि पृथ्वीराज शब्दभेदी बाण चलाने में प्रवीन थे. उनके मित्र चंदबरदाई ने एक दोहे के रूप में मोहम्मद गौरी के बैठने की स्थिति का वर्णन किया.

जैसे ही चंदबरदाई ने दोहा ख़त्म किया. पृथ्वीराज चौहान ने अपना बाण चलाया. और मोहम्मद गौरी की हत्या कर दी. इसके बात दुर्गति से बचने के लिए दोनों ने एक दुसरे की प्राण ले लिए थे. इस प्रकार से एक महान हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान का देहांत हो गया. पृथ्वीराज चौहान के मरने की खबर को प्राप्त करके उनकी रानी संयोगिता ने भी अपने प्राण ले लिए.

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निष्कर्ष

इस आर्टिकल (पृथ्वीराज चौहान की तलवार का वजन कितना था | पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु कैसे हुई थी | पृथ्वीराज चौहान का जन्म कब हुआ था ) में आपने जाना की पृथ्वीराज चौहान का इतिहास क्या था. पृथ्वीराज चौहान एक महान योध्दा और उदार राजा थे. जिन्हें धोखे से बंधी बनाया गया था. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी शब्दभेदी बाण विधा का उपयोग करते हुए. पुरे संभा में मोहम्मद गौरी का वध कर दिया. पृथ्वीराज चौहान के त्याग और बलिदान को भारत हमेशा याद करता रहेगा. पृथ्वीराज चौहान के कवच, ढाल और तलवार को मिलाकर कुल वजन 207 किलोग्राम था.

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