संविधान किसे कहते हैं | संविधान का अर्थ क्या हैं

संविधान किसे कहते हैं | संविधान का अर्थ क्या हैं | sanvidhan kise kahate hain |भारतीय संविधान के लेखक कौन थे – किसी भी देश को गणराज्य बनाने के लिए  उस देश की संविधान की भूमिका अग्रणीय होती हैं. संविधान के बिना किसी राष्ट्र की शासन प्रणाली को सुचारू रूप से चलाना असंभव होता हैं. इस आर्टिकल में हम जानेगे की संविधान किसे कहते हैं. संविधान का अर्थ किया होता हैं. और साथ में संविधान के कितने रूप होते हैं. इसके साथ आर्टिकल में हम जानेगे की भारतीय संविधान के लेखक कौन थे.

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संविधान किसे कहते हैं | संविधान का अर्थ क्या हैं | sanvidhan kise kahate hain

किसी भी देश का संविधान वह लेख पत्र होता हैं. जिसमें उस देश के शासनप्रबंध से जुड़े आवश्यक विधि, कानून, नियम और लिखे होते हैं. संविधान मूल सिद्धांतों और स्थापित नजरियों का लिखित में उपलब्ध पुस्तक या पत्र होता है. जिसके द्वारा कोई राज्य, देश या संगठन अभिशासित होते हैं.

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किसी भी देश का संविधान हमेशा लिखित रूप में उपलब्ध होता है. तथा यह राष्ट्र के शासन करने का आधार होता है. यह राष्ट्र के चरित्र, संगठन और नीति को निर्धारित करता है. संविधान में राष्ट्र को शासन को चलाने के लिए परम विधि होती हैं. संविधान में मौजूद कानून का पालन करना अनिवार्य होता है. अगर राष्ट्र का कोई भी व्यक्ति इन कानूनों का उल्लंघन करता है. तो वह असंवैधानिक घोषित किया जाता है.

सबसे लम्बा और छोटा संविधान कौनसा हैं?

भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है. इस लिखित संविधान के अंग्रेजी भाषा सस्करण में कुल 146,385 शब्द है. 25 भागो में 448 अनुच्छेद है. 12 अनुसूचियां हैं और 104 संशोधन है. वही शब्दों के आधार पर सबसे छोटा लिखित संविधान मोनाको का संविधान है. जिसमें सिर्फ 97 अनुच्छेद के साथ 10 अध्याय हैं. और मात्र 3814 शब्द है. वहीं अमेरिका के संविधान में 4,543 शब्द मौजूद है. जो दुनिया का सबसे पुराना सविधान कहा जाता है.

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संविधान के रूप

संविधान शब्द का प्रयोग दो रूपों में किया जाता है. यह दोनों संकुचित और विस्तृत रूप है. विस्तृत रूप का इंग्लैंड का संविधान साक्षी है. इस संविधान में शासन प्रबंध के संबंधित सभी नियम होते हैं. लेकिन इन नियमों में से कुछ ऐसे नियम भी होते हैं. जो न्यायालय के द्वारा माननीय तथा लागू नहीं किए जाते हैं. विधि से परे इन नियमों की उत्पत्ति परंपरागत कथाओ, प्रचलित व्यवहारों और रूढ़िवादी से होती हैं.

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वही संकुचित रूप के उदाहरण भारत तथा संयुक्त राष्ट्र का संविधान है. इन सविधान में सिर्फ जन विशेष और शासन के प्रबंध के ही नियम होते हैं. यह संविधान मूल रूप से किसी राष्ट्र या देश की शासन पद्धति का लिखित रूप होता है. जिसमें उस देश के शासन प्रबंध में अनुशासन कायम करने कानून और नियम लिखे होते हैं.

लिखित और अलिखित संविधान क्या होते हैं?

संविधान लिखित और अलिखित दोनों प्रकार के हो सकते हैं. दुनिया में ऐसे बहुत से देश हैं जिन देशों का संविधान लिखित रूप में मौजूद हैं लेकिन ऐसे भी देशों की कमी नहीं है. जिन का संविधान लिखित में उपलब्ध नहीं है. ऐसे सविधान को मौखिक या अलिखित संविधान कहा जाता है.

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लिखित संविधान क्या होता है?

जिन देशों की शासन पद्धति और शासन प्रबंध में अनुशासन के नियम और कानून लिखित रूप में लेखपत्र के रूप में उपलब्ध हैं. ऐसे संविधान को लिखित सविधान कहा जाता है.

अलिखित संविधान क्या होता हैं?

जब किसी देश और राष्ट्र की शासन पद्धति और शासन प्रबंध में अनुशासन के नियम और कानून किसी एक दस्तावेज में लिखकर या लिखे हुए उपलब्ध नहीं होते हैं. ऐसे संविधान को मौखिक या अलिखित संविधान कहा जाता है. ऐसे राष्ट्र के संविधान एक से अधिक दस्तावेजों में लिखे होते हैं या मौखिक रूप से याद रखे जाते हैं.

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भारतीय संविधान के लेखक कौन थे?

भारतीय संविधान के लेखक डॉ भीमराव अंबेडकर थे. स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान के निर्माण के लिए 29 अगस्त 1947 को प्रारूप समिति की स्थापना की गई थी. जिसके अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर को बनाया गया था. उन्होंने दुनियाभर के तमाम संविधानो का अध्ययन किया. और भारतीय संविधान का मसौदा तैयार किया.

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निष्कर्ष

इस आर्टिकल (संविधान किसे कहते हैं | संविधान का अर्थ क्या हैं | sanvidhan kise kahate hain |भारतीय संविधान के लेखक कौन थे ) को लिखने का हमारा उद्देश्य आपको संविधान के अर्थ और उद्देश्य को सरल भाषा में बताना हैं. किसी भी देश का संविधान वह लेख पत्र होता हैं. जिसमें उस देश के शासन प्रबंध से जोड़े आवश्यक विधि, कानून, नियम और लिखे होते हैं. भारतीय संविधान के लेखक डॉ भीमराव अंबेडकर थे.

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